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अंधेर नगरी

ममममम मममममममम मममममममममम मम


अंधेर नगरी प्रसिद्ध स ं दी िास त्यकार भारतें दु ररश्चंद्र का िर्ाासधक लोकप्रीय नाटक ै । ६अंकों के इि नाटक में
सर्र्ेक ीन और सनरं कुश शािन व्यर्स्था पर करारा व्यंग्य करते हुए उिे अपने ी कमों द्वारा नष्ट ोते सदखाया गया
ै । भारतेंदु ने इिकी रचना बनारि के स ं दू नेशनल सथएटर के सलए एक ीं सदन की थी

अनु क्रम
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 1कथानक
 2पात्र
 3िन्दभा
 4इन्हें भी दे खें
 5बा री कस़ियाँ

कथानक[िंपासदत करें ]
य नाटक ६ अंकों में सर्भक्त ै । इिमें अंक के बजाय दृश्य शब्द का प्रयोग सकया गया ै। पहले दृश्य में म ं त
अपने दो चेलों के िाथ सदखाई प़िते ैं जो अपने सशष्ों गोर्धान दाि और नारायण दाि को पाि के श र में सभक्षा
माँ गने भेजते ैं । र्े गोर्धा न दाि को लोभ के बुरे पररणाम के प्रसत िचे त करते ैं । दू सरे दृश्य में श र के बाजार का
दृश्य ै ज ाँ िबकुछ टके िेर सबक र ा ै। गोर्धा न दाि बाजार की य कफैयत दे खकर आनन्दन्दत ोता ै और
िात पैिे में ढाई िेर समठाई लेकर अपने गुरु के पाि लौट जाता ै । तीसरे दृश्य में म ं त के पाि दोनों सशष् लौटते
ैं । नारायण दाि कुछ न ीं लाता ै जबसक गोबधा न दाि ढाई िेर समठाई ले कर आता ै । म ंत श र में गु णी और
अर्गु णी को एक ी भार् समलने की खबर िुनकर िचेत ो जाते ैं और अपने सशष्ों को तुरंत ी श र छो़िने को
क ते ैं । र्े क ते ैं - "िेत िेत िब एक िे, ज ाँ कपूर कपाि। ऐिे दे श कुदे ि में, कबहँ न कीजै बाि।।" नारायण
दाि उनकी बात मान लेता ै जबसक गोर्धा न दाि िस्ते स्वासदष्ट भोजन के लालच में र् ीं र जाने का फैिला करता
ै । चौथे दृश्य में अंधेर नगरी के चौपट राजा के दरबार और न्याय का सचत्रण ै। शराब में डूबा राजा फररयादी के
बकरी दबने की सशकायत पर बसनया िे शुरु ोकर कारीगर, चू नेर्ाले , सभश्ती, किाई और ग़िररया िे ोते हुए
कोतर्ाल तक जा पहुंचता ै और उिे फां िी की िजा िुना दे ता ै । प ाँचवें दृश्य में समठाई खाते और प्रिन्न ोते मोटे
ो गए गोर्धा न दाि को चार सिपा ी पक़िकर फां िी दे ने के सलए ले जाते ैं । र्े उिे बताते ैं सक बकरी मरी इिसलए
न्याय की खासतर सकिी को तो फाँ िी पर जरूर चढाया जाना चास ए। जब दु बले कोतर्ाल के गले िे फां िी का फँदा
ब़िा सनकला तो राजा ने सकिी मोटे को फाँ िी दे ने का हुक्म दे सदया। छठे दृश्य में शमशान में गोर्धा न दाि को फाँ िी
दे ने की तै यारी पूरी ो गयी ै । तभी उिके गु रु म ंत जी आकर उिके कान में कुछ मंत्र दे ते ैं । इिके बाद गुरु
सशष् दोनों फाँ िी पर चढने की उतार्ली सदखाते ैं । राजा य िुनकर सक इि शुभ िइयत में फाँ िी चढने र्ाला िीधा
बै कुंठ जाएगा स्वयं को ी फाँ िी पर चढाने की आज्ञा दे ता ै । इि तर अन्यायी और मूखा राजा स्वतः ी नष्ट ो जाता
ै।

पात्र[िंपासदत करें ]
 म न्त - एक िाधू
 गोर्धा न दाि - म ं त का लोभी सशष्
 नारायण दाि- म ं त का दू िरा सशष्
 कबाबर्ाला कबाब सर्क्रेता
 घािीराम :चना बेचने र्ाला
 नरं गीर्ाली - नारं गी बेचने र्ाली
 लर्ाई - समठाई बे चने र्ाला
 कुजस़िन - िब्जी बेचने र्ाली
 मुगल - मेर्े और फल बेचने र्ाला
 पाचकर्ाला - चू रन सर्क्रेता
 मछलीर्ाली - मछली बेचने र्ाली
 जातर्ाला - जासत बेचने र्ाला
 बसनया
 राजा - चौपट राजा
 मन्त्री - चौपट राजा का मंत्री
 माली
 दो नौकर, राजा के दो नौकर
 फररयादी - राजा िे न्याय माँगने र्ाला
 कल्लू - बसनया सजिके दीबार िे फररयादी की बकरी मरी
 कारीगर - कल्लु बसनया की दीबार बनाने र्ाला
 चू नेर्ाला - दीर्ार बनाने के सलए मिाला तै यार करने र्ाला
 सभश्ती - दीर्ार बनाने के मिाले में पानी डालने र्ाला
 कस्साई - सभश्ती के सलए मशक बनाने र्ाला
 ग़िे ररया - - किाई को भें़ि बेचने र्ाला
 कोतर्ाल -
 चार सिपा ी - राजा के सिपा ी

िन्दभा[िंपासदत करें ]

इन्हें भी दे खें[िंपासदत करें ]


 भारत दु दाशा