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फ़रमान न: 8 ह क बाहम ी के व उन के मु तका असर क िमकदार (सफ़ा 113/1952)

क़ायम हो हर दे खा जाने वाले या दू सरे हमसाया ( मुशतका होने वाले) ह क ताक़त होगी
या दे खता
बृ ह पित सूरज चँदर शुकर मंगल बुध सिनचर राहू केतू
होवे
बृ ह पित 2 1/2 3¾ 2/1 2/1 3/1 2/1 5/4

दौलत 2/3
सूरज 2/3 3/4 3/4 2/1 1/2 हण 1/2
वािलद 1/2

सुख 1/3

n
चँदर 2/1 2/1 2/1 2/2 2/1 1/3 1/2 हण

tio
शुकर 1/2 3/4 1/2 4/3 2/2 1/3 2/1 2/1

मंगल 2/1 2 2/1 1/3 मंगल 2/1 4/3 0/1 1/2

bu
बद 1/3
बुध 1/2 2/1 1/2 2/2 2/2 5/4 2/1 1/4

tri
दौलत 2/3
सिनचर 5/4 1/3 4/3 1/3 4/5 2/1 1/2

राहू 0/1
वािलद 1/2
सुख 1/3

हण 1/2 1/3
on
2/2 2/1 2/1 2/2
C
केतू 2/1 2/3 हण 2/1 1/2 3/4 2/1 2/2
s

दो ती दु मनी का भाव नेक व बुरे ह से क िमकदार होगी


t

औसत तनासब के हं दस म रक़म का ऊपर का जुज दे खा जाने वाले ह के असर क िम दार और नीचे का जुज
en

दे खने वाले ह का असर क िमकदार होगी। िसफ़ एक ह जुज से पूरा पूरा ह सा दे खा जाने वाले ह क ताक़त
से मुराद होगी।
ud
st
t ro
As

Transliteration of table at Page 113 of LalKitab 1952